कंप्यूटर क्या है और कंप्यूटर का क्या इतिहास हैं

आप सभी लोगों ने अपने जीवन भर में कभी ना कभी तो कंप्यूटर का उपयोग किया ही होगा और आप में से ही कुछ लोग तो ऐसे होंगे जो कि अपना ज्यादा से ज्यादा समय कंप्यूटर के साथ ही बिताते है। आप सभी लोग कंप्यूटर तो चलाते है, परंतु क्या आप जानते है, कि आखिर Computer Kya hai और कंप्यूटर का इतिहास क्या हैं? यदि नहीं तो आप सभी लोगों के लिए हमारा यह लेख बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला हैं।

आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखे गए इस लेख में कंप्यूटर के विषय में सभी जानकारियां बड़ी ही आसानी से मिल जाएंगे। यदि आप सभी लोग कंप्यूटर के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें क्योंकि आपको इस लेख में कंप्यूटर से जुड़ी हुई सभी प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में पता चलने वाला हैं।

कंप्यूटर क्या हैं

कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है जोकि यूजर द्वारा इनपुट दिए जाने पर हमें आउटपुट डाटा प्रदान करता है। यदि आप कंप्यूटर में इंटरनेट का उपयोग करते है तो आपको कंप्यूटर में स्टोर डाटा के अलावा भी अन्य डाटा की सूचनाएं देखने को मिल सकती है। कंप्यूटर में स्टोर, पुनः प्राप्त और प्रोसेस करने की क्षमता होती है। कंप्यूटर क्षमता के कारण हमें आउटपुट डाटा प्रदान करता है। कंप्यूटर का उपयोग आप दस्तावेजों को टाइप करने, ईमेल भेजने, गेम खेलने और वेब ब्राउज़र के लिए भी उपयोग कर सकते हैं।

वर्तमान समय में कंप्यूटर का उपयोग इसके अलावा स्प्रेडशीट, प्रेजेंटेशन और वीडियो बनाने के लिए भी किया जा रहा है। किसी भी मॉडर्न डिजिटल कंप्यूटर के कई कॉम्पोनेंट्स होते है परंतु उनमें से कुछ बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होते है जैसे कि इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस, सीपीयू, स्टोरेज डिवाइस इत्यादि। वर्तमान समय में कंप्यूटर बहुत ही ज्यादा प्रचलित हो चुका है। कंप्यूटर आपको उन्हीं चीजों को दिखा सकता है जो उस में स्टोर किया गया हो परंतु वर्तमान समय में बनाए गए मॉडर्न कंप्यूटर में आप सभी लोग स्टोर डाटा के अलावा इंटरनेट का उपयोग करके अन्य उपयोगी डाटा को भी सर्च कर सकते है और उनके विषय में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

हार्डवेयर क्या हैं

कंप्यूटर के वे सभी भाग जिन्हें हम आसानी से छू सकते है उन्हें महसूस कर सकते है और उन्हें देख सकते है कंप्यूटर के ऐसे मशीनरी को ही हार्डवेयर कहा जाता है। इसके अंतर्गत मॉनिटर प्रिंटर सीपीयू कीबोर्ड माउस इत्यादि आते है। दूसरे शब्दों में हार्डवेयर उन्हीं को कहा जाता है जिनके माध्यम से हम डाटा को कंप्यूटर में इनपुट करते है। हार्डवेयर का उपयोग करके कंप्यूटर में डाटा input कराने के बाद कंप्यूटर तक यह संदेश चला जाता है कि हम क्या देखना चाहते है और कंप्यूटर के साथ क्या करना चाहते है। हम सभी लोग कंप्यूटर में हार्डवेयर के रूप में माउस, कीबोर्ड, सीपीयू, प्रिंटर, मॉनिटर इत्यादि को देख सकते हैं।

हार्डवेयर कैसे काम करता हैं

हार्डवेयर की कार्यप्रणाली बहुत ही ज्यादा सरल है। आप सभी लोग हार्डवेयर का उपयोग करके कुछ ही समय में कंप्यूटर के माध्यम से अपने सभी डाटा को अपने मॉनिटर की स्क्रीन पर देख सकते है। यदि हार्डवेयर की कार्यप्रणाली के विषय में देखा जाए तो हार्डवेयर के माध्यम से जब आप कभी भी किसी भी डाटा को प्रविष्ट कराते है तो डाटा को प्रविष्ट कराने के लिए आप जिस हार्डवेयर का उपयोग करते है वह एक्सटर्नल हार्डवेयर होता है। हमारे द्वारा इनपुट किए गए डाटा को कंप्यूटर के मस्तिष्क अर्थात सीपीयू तक पहुंचाने के लिए जो हार्डवेयर काम आते है उन सभी हार्डवेयर्स को इंटरनल हार्डवेयर कहा जाता है। यह दोनों भाग कंप्यूटर के बहुत ही महत्वपूर्ण भाग होते है। आप सभी लोग कंप्यूटर के हार्डवेयर का उपयोग इन्ही एक्सटर्नल एवं इंटरनल हार्डवेयर के माध्यम से ही कर पाते है। External Hardware के रूप में आप कंप्यूटर से संलग्न मशीन जैसे कि मॉनिटर प्रिंटर कीबोर्ड सीपीयू यूपीएस इत्यादि को देख सकते है। इसी तरह आप सभी लोग Internal hardware के रूप में एक्सटर्नल हार्ड वेयर के अंदर मौजूद मशीन जैसे कि मदर बोर्ड, रैम, रोम, ग्राफिक कार्ड, पावर सप्लाई यूनिट, नेटवर्क कार्ड इत्यादि देख सकते हैं।

सॉफ्टवेयर क्या हैं

हम सभी लोग कंप्यूटर के जिन भागों को छू तो नहीं सकते परंतु उनके विषय में अध्ययन कर सकते है और उनकी जानकारी प्राप्त कर सकते है उन्हें ही कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर कहा जाता है। सॉफ्टवेयर किसी भी कंप्यूटर का एक ऐसा समूह होता है जो कि कंप्यूटर के उपयोग मेला जाने वाले हार्डवेयर्स को यह बताता है कि उन्हें क्या काम करना है और इस काम को कैसे करना है। उदाहरण के तौर पर आप सभी लोग ब्राउज़र गेम वर्ल्ड प्रोसेसर एमएस वर्ड ऑफिस इत्यादि को देख सकते है। यदि हम आप सभी लोगों को अन्य शब्दों में बताएं तो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक ऐसा डिजिटल प्रोडक्ट है जो केवल हमें दिखाई देता है हम उन्हें छू नहीं सकते। सॉफ्टवेयर का अर्थ पूर्ण रूप से कोड का कलेक्शन से होता है। यदि आप खुद का कोई सॉफ्टवेयर बनाना चाहते है तो आपको कोडिंग आना बहुत ही जरूरी है आप सभी लोग कोडिंग की मदद से किसी भी सॉफ्टवेयर को अच्छे से जनरेट कर पाएंगे।

सॉफ्टवेयर कैसे काम करता हैं

सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली हार्डवेयर की कार्यप्रणाली से थोड़ी कठिन है। हार्डवेयर का उपयोग करने के लिए हमेशा साधारण रूप से केवल हार्डवेयर के मशीनरी के माध्यम से कंप्यूटर में डाटा प्रवेश करा देते है परंतु हमारे प्रवेश कराए गए डाटा को इन सभी के माध्यम से हमें हमारी कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखाया जाता है उन्हें ही सॉफ्टवेयर कहते है। यदि हम साधारण शब्दों में कहें तो सॉफ्टवेयर नेटवर्क ओं का एक जाल होता है। जिस तरह नेटवर्क एक दूसरे नेटवर्क पॉइंट से वायरलेस जाल के माध्यम से जुड़े होते है ठीक उसी प्रकार सॉफ्टवेयर भी एक दूसरे कंप्यूटर या फिर नेटवर्क के समूह से जुड़ा होता है। आप सभी लोग सॉफ्टवेयर को गेम्स, एमएस वर्ड ऑफिस, आईटेल कोर, विंडोज, मोबाइल फोन सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन इत्यादि के माध्यम से समझ सकते हैं।

विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर्स

हम सभी लोग अपने जीवन भर में जब कभी भी कंप्यूटर का नाम सुनते है तो हमारे सामने डेस्कटॉप कंप्यूटर का चित्र आता है परंतु हम आप सभी लोगों को यह बता देना चाहते है कि आप अपने जीवन में जो एक छोटा सा स्मार्टफोन यूज करते है वह भी कंप्यूटर का ही एक भाग होता है। वर्तमान समय में कंप्यूटर को उनके आकार एवं आकृति के आधार पर निम्न वर्गों में बांटा गया हैं।

  1. Desktop computer
  2. Laptop
  3. Tablet or Mobile Phone

डेस्कटॉप कंप्यूटर

डेस्कटॉप कंप्यूटर एक ऐसा कंप्यूटर होता है, जिसका उपयोग हम केवल अपने घर में एक स्थान पर स्थापित करके ही कर सकते है। ऐसे कंप्यूटर पोर्टेबल नहीं होते है, अर्थात इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से नहीं किया जा सकता, अतः डेस्कटॉप कंप्यूटर कोनॉन पोर्टेबल कंप्यूटर कहा जाता है। इनका आकार थोड़ा बड़ा होता है, जिसके कारण इन्हें कहीं पर भी आसानी से नहीं ले जाया जा सकता। डेस्कटॉप कंप्यूटर तभी पूर्ण रूप से तैयार कंप्यूटर माना जाएगा जब उन्हें आवश्यक मशीनरी से जुड़ी होंगी जैसे कि मॉनिटर, माउस, कीबोर्ड, सीपीयू, यूपीएस इत्यादि।

लैपटॉप

लैपटॉप एक ऐसी कंप्यूटर की श्रेणी में आता है, जिसका उपयोग हम किसी भी स्थान पर और कभी भी कर सकते है। लैपटॉप को पोर्टेबल कंप्यूटर भी कहा जाता है अर्थात आप इस लैपटॉप को कहीं पर भी ले जा सकते है वह भी बड़ी ही आसानी से। इस कंप्यूटर का आकार डेस्कटॉप कंप्यूटर की तुलना में काफी कम होता है। आप लैपटॉप का उपयोग उन कार्यों के लिए बड़ी ही आसानी से कर सकते है जिन कार्यों को कंप्यूटर में किया जाता है। आप सभी लोगों को लैपटॉप को संचालित करने के लिए अन्य किसी उपकरण जैसे माउस, मॉनिटर, कीबोर्ड, सीपीयू, यूपीएस इत्यादि की आवश्यकता नहीं है आप चाहे तो लैपटॉप में अन्य उपकरण लगाकर उपयोग में ला सकते हैं।

टेबलेट और मोबाइल फोन

हम सभी लोगों ने कंप्यूटर के एक छोटे रूप लैपटॉप के विषय में जाना। लैपटॉप भी एक कंप्यूटर है ठीक इसी प्रकार कंप्यूटर और टेबलेट का एक छोटा सा वर्जन टेबलेट और टेबलेट का छोटा रूपांतरण आप स्मार्टफोन को ले सकते है। आप जो भी काम लैपटॉप या अपने डेस्कटॉप कंप्यूटर में कर सकते है वही काम आप मोबाइल फोन या लैपटॉप में भी कर सकते है। जहां लैपटॉप पोर्टेबल होता था वहीं पर टैबलेट और स्मार्टफोन हैडेबल कंप्यूटर होते है। हम सभी लोग टेबलेट के माध्यम से वह सभी काम कर सकते है जो कि एक लैपटॉप या कंप्यूटर में किया जाता हैं।

कंप्यूटर का इतिहास

Charles Babbage ने ही सन 1837 ईस्वी में एनालिटिकल इंजन को बनाया था एनालिटिकल इंजन के माध्यम से ही कंप्यूटर को कंट्रोल किया जा रहा था। चार्ल्स बैबेज के द्वारा बनाए गए इस इंजन में ए एल यू, बेस्ट फ्लो कंट्रोल और इंटीग्रेटेड मेमोरी काफी हद तक कार्यरत थी। चार्ल्स बैबेज के द्वारा बनाया गया यह इंजन काफी कार्यरत साबित हुआ जिसके कारण बाद में उन्हें कंप्यूटर के पिता की उपाधि दे दी गई अतः तभी से चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जनक कहा जाता है। चार्ल्स बैबेज ने कंप्यूटर के फील्ड में अपना सबसे विशेष योगदान दिया था इसी के कारण इन्हें कंप्यूटर के पिता होने की उपाधि प्राप्त हुई।

हालांकि कंप्यूटर के निर्माण में चार्ल्स बैबेज से पहले भी बहुत से लोगों ने अपना अपूर्व योगदान दिया, परंतु कंप्यूटर को विशेष प्रगति तभी मिली जब चार्ल्स बैबेज ने अपना सबसे पहला कंप्यूटर बनाया था। कंप्यूटर के डेवलपमेंट में विकासशील की प्रणाली की शुरुआत कब से हुई इसके विषय में तो कोई सटीक प्रमाण नहीं है परंतु कंप्यूटर के डेवलपमेंट को कई पीढ़ियों के अनुसार बताया जा सकता है। कंप्यूटर के डेवलपमेंट की वीडियो के अनुसार व्याख्यान नीचे निम्नलिखित प्रकार से बताया गया हैं।

  • First generation
  • Second generation
  • Third generation
  • Fourth generation
  • Fifth generation

1. First Generation Computers

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर का आविष्कार 1940 ईस्वी में शुरू हुआ था। प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में मेमोरी के स्थान पर वेक्यूम ट्यूब सर्किट और मैग्नेटिक ड्रम का उपयोग किया जाता था। प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में बहुत ही ज्यादा बड़े होते थे जिसके कारण उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में काफी कठिनाई होती थी। इतना ही नहीं प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर को चलाने के लिए काफी ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती थी। यह कंप्यूटर बड़ा होने के कारण बहुत ही ज्यादा गर्मी उत्पन्न करता था जिसके कारण इससे यह कई बार लॉक भी हो जाता था। आकार में इतना ज्यादा बड़ा होने के कारण और इतनी गर्मी उत्पन्न करने की वजह से इस कंप्यूटर का प्रोडक्शन वर्ष 1956 ईस्वी में बंद कर दिया गया।

2. Second Generation Computers

द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर का आविष्कार 1956 ईस्वी में किया गया। द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर में आकार छोटा करने के लिए वेक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांसिस्टर्स का प्रयोग किया जाने लगा। ट्रांजिस्टर आकार में vacuum tube की तुलना में काफी ज्यादा छोटे होते थे और काफी ज्यादा फास्ट भी होते थे। द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर में प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर के मुकाबले काफी कम बिजली खर्च होती थी और इससे गर्मी भी प्रथम पीढ़ी के मुकाबले काफी कम उत्पन्न होती थी। इतने सभी सुधार करने के बाद भी इसमें गर्मी की समस्या अभी भी रह गई थी जिसके कारण वर्ष 1963 ईस्वी में इसका प्रोडक्शन भी बंद कर दिया गया।

3. Third Generation Computers

तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर का आविष्कार वर्ष 1963 ईस्वी में शुरू हो गया था। तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट का उपयोग किया जाने लगा। तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर में इंटीग्रेटेड सर्किट को बनाने के लिए ट्रांजिस्टर के छोटे-छोटे चीप का उपयोग किया जाने लगा जिसे सेमीकंडक्टर कहा जाता था। इसके उपयोग से यह फायदा हुआ कि कंप्यूटर की जो प्रोसेसिंग सिस्टम की वह काफी ज्यादा तेज हो गई और इसकी स्टोरेज क्षमता भी काफी ज्यादा बढ़ गई। तृतीय पीढ़ी का कंप्यूटर पहला ऐसा कंप्यूटर था जिसे चलाने के लिए मॉनिटर कीबोर्ड और ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाने लगा। इसमें भी कुछ त्रुटियां रह गई थी जिसके कारण वर्ष 1971 ईस्वी में इस कंप्यूटर को बंद करना पड़ा क्योंकि इसकी बिक्री नहीं हो रही थी।

4. Fourth Generation Computers

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर का आविष्कार वर्ष 1971 में शुरू हो गया। चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर वर्तमान समय के मॉडर्न कंप्यूटर के रूप में प्रचलित है। चौथी पीढ़ी का कंप्यूटर में माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग किया जाने लगा। इस कंप्यूटर में मेमोरी कार्ड के स्थान पर अनेकों इंटीग्रेटेड सर्किट को मिलाकर एक सिलीकान चिप बनाया गया जिसे इस कंप्यूटर में अपडेट कर दिया। इससे यह लाभ हुआ कि कंप्यूटर का आकार काफी ज्यादा छोटा हो गया। यह कंप्यूटर अब भी मार्केट में किसी भी व्यक्ति को बड़ी ही आसानी से मिल जाएगा। इस पीढ़ी के कंप्यूटर में आपको इसके मॉनिटर की छुट्टियां मिलती थी जिसके कारण इसके मॉनिटर को चेंज कर दिया गया। इस कंप्यूटर की पीढ़ी का समय 1985 तक रहा।

5. Fifth Generation Computers

पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर को वर्ष 1950 ईस्वी से ही बनाया जा रहा है। ऐसे कंप्यूटर को बनाने का केवल यही उद्देश्य है कि कोई भी कार्य करने के लिए केवल हमें एक बार कहना पड़ेगा और वह हमारा काम बड़ी ही आसानी से कर दे। हालांकि इस कार्य को कर भी दिया गया है। वर्तमान समय में बहुत से ऐसे रोबोट बनाएं जा चुके है जो कि केवल हमारे एक कहने पर ही सभी कार्य कर देते है। इन्हीं रोबोट को ही पांचवी पीढ़ी का कंप्यूटर कहा जाता हैं।

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निष्कर्ष

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Junaid Bashir

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This Post Has 6 Comments

  1. Raju

    Like!! Great article post. Really thank you! Really Cool.

  2. Pushpa

    yesi jankari sheyar karne ke liye apka bahut bahut dhnyavad

  3. Rajat Pandey

    really very interesting junaid bhai .

    keep growing. thanku for sharing this article.

  4. Chhotu Vishwakarma

    Hii

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