Goldfish Ka Scientific Naam Kya Hai । गोल्डफिश का साइंटिफिक नाम क्या है

यह एक प्रचलित टॉपिक बन चुका है जिसके बारे में और कोई एक बार गूगल पर सर्च करना चाहता है क्योंकि इसके बारे में लोग गूगल के प्रचार में देख रहे है। हालांकि सचमुच भी आपको सुनहरी मछली का साइंटिफिक नाम पता होना चाहिए, हम आपकी जिज्ञासा की कद्र करते है और आज के लेख में Goldfish Ka Scientific Naam Kya Hai के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी देने का प्रयास कर रहे है। जो लोग मेडिकल की पढ़ाई करते है या जीव विज्ञान से जुड़ी जानकारी को प्राप्त करना चाहते है उन सबके लिए सुनहरी मछली का साइंटिफिक नाम पता करना काफी आवश्यक है क्योंकि इस तरह के प्रश्न अक्सर परीक्षा में भी पूछे जाते हैं।

Goldfish किसे कहते है

Golden Fish को सुनहरी मछली भी कहा जाता है, यह मछली इतनी खूबसूरत होती है कि लोग इसे अपने घर में रखना पसंद करते है। आप यह कह सकते है कि यह शो पीस वाली मछली है, मगर वैज्ञानिक इसके लिए अलग किस्म का नाम प्रयोग करते है जिस वजह से Goldfish ka scientific name kya hai जैसे सवाल उठते है और हर कोई यह जानने का प्रयास करता है कि आखिर वैज्ञानिक या विज्ञान में इस मछली को किस नाम से परिभाषित किया गया हैं।

इसके साइंटिफिक नाम को जानने से पहले आपको बता दें कि यह मछली साईप्रिनीफॉर्म्स के कार्प परिवार में एक तेज पानी वाली मछली है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इंसानों ने सबसे पहले गोल्डफिश को ही पालतू मछली बनाया था। आज भी घर या ऑफिस में पाए जाने वाले एक्वेरियम में सबसे अधिक रखे जाने वाली मछली गोल्डफिश हैं।

सुनहरी मछली आमतौर पर व्यक्तिगत जीवन में 5 इंच की नजर आती है मगर कई जगहों पर पाया गया है कि सुनहरी मछली की लंबाई अधिकतम 1 फुट तक हो सकती है। इसका वजन अधिकतम 4 किलो और कम से कम 100 ग्राम का होता है। हम व्यक्तिगत जीवन में जिस गोल्डफिश को देखते है उसका वजन 100 से 200 ग्राम का होता है और लंबाई में भी व 5 से 6 इंच लंबी होती है। घर और एक्वेरियम में रखने के कारण इनका वजन और लंबाई ही नहीं बल्कि जीवन काल भी कम हो जाता हैं।

Goldfish के प्रकार

जैसा कि गोल्डफिश को हम विश्व के कुछ प्रचलित मछलियों में से एक मानते है मगर आपको बता दें कि इस मछली के विभिन्न प्रकार होते है उनमें से कुछ प्रकार के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी नीचे देने का प्रयास किया गया हैं।

जैसा कि हम सब जानते है, प्रकृति के द्वारा सदियों से चलाए जा रहे चयनित प्रजनन की वजह से जीव जंतुओं में रंग और आकार को लेकर परिवर्तन किया गया है प्रकार ऐसे होते है जो जीव को पहले के मुकाबले ज्यादा कमजोर बना देते हैं। 

मगर उसकी वजह से वह फालतू बन पाते है और उनका जीवन पहले से सुगम हो जाता है इसके विपरीत कई जगहों पर प्रकृति के द्वारा चयनित प्रजनन के जरिए जीव को और कठोर और मजबूत बना दिया जाता है आज हम गोल्डफिश में हुए प्राकृतिक परिवर्तन के वजह से कितने प्रकार संसार में आए है इस संबंध में चर्चा करेंगे। 

1. आम सुनहरी मछली

हम अपने व्यक्तिगत जीवन में जिस सुनहरी मछली को देखते है, उसे आम सुनहरी मछली कहा जाता है जो अपने पूर्वज पार्सिया कार्प में हुए चयनित प्रजनन की वजह से बनी है। उस परिवार में हुए बदलाव की वजह से आम सुनहरी मछली को एक अनोखा रंग मिला जिस रंग की वजह से वह सभी को पसंद आने लगी, इस प्रजनन के बाद सुनहरी मछली लाल, नारंगी, नींबू रंग में पाई जाती हैं।

2. काले मूर

भारत में एक खास किस्म की मछली पाई जाती है जिसकी दूरबीन आंखें उसकी खासियत है वह अपने बड़ी-बड़ी आंखों से दूर तक देख सकती है इसे काले मूर के नाम से जाना जाता है। यह सुनहरी मछली का ही एक प्रकार है, यह सुनहरी मछली की एक खास किस्म की प्रजाति है जिसमें दूरबीन आंखें मछली की खासियत बन जाती है। इस मछली को अमेरिका में पोपय टेलीस्कोप, जापान में कुरु दमिकिन, और चाइना में ड्रैगन आई के नाम से जाना जाता हैं।

3. सेलेस्चिय्ल आई सुनहरीमछली

इस मछली को चोटेन गान भी कहा जाता है, यह दोहरी धूम वाली एक नस्ल परिभाषित मछली है इसकी बड़ी बड़ी दूरबीन आंखें आकाश की ओर देखती है और उल्टी पुतलियां इस मछली को खास पहचान देती हैं। 

4. कॉमेट सुनहरी मछली

इस मछली को धूमकेतु सुनहरी मछली भी कहा जाता है। यह मछली खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में पाई जाती है यह मछली कुछ-कुछ दिखने में आम सुनहरी मछली जैसी ही होती है। इस मछली की सबसे बड़ी खासियत होती है कि आपको इस मछली में कांटेदार गहरी पूछ देखने को मिलेगी। यह मछली भी विभिन्न रंगों में पाई जाती है और लोगों को काफी अधिक पसंद आती हैं।

5. फेंटेल

यह सुनहरी मछली का एक और प्रचलित रूप है हम यह कह सकते है कि यह मछली सुनहरी मछली का पश्चिमी रूप है इसके पास एक अंडे आकार का शरीर होता है जिसके गर्दन पर कोई उधार नहीं होता साथ ही इसके शरीर से थोड़े लंबे आकार की पूछ होती हैं।

6. ओरंडा

यह एक और प्रचलित सुनहरी मछली का प्रकार है इस मछली की सबसे बड़ी खासियत है कि इसके सिर पर रास्पबेरी जैसी एक हुड होती है जिसकी वजह से यह मछली और भी आकर्षक लगती है। यह मछली अपने आंख और मुंह के चारों तरफ बने हुडको चौड़ा करके पूरे शरीर को ढक लेती है जिस वजह से काफी लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं।

Goldfish का साइंटिफिक नाम क्या है

गोल्डफिश के प्रकार और उसके संबंध में आपको विभिन्न प्रकार की जानकारी मिली होगी इसके साइंटिफिक नाम को अच्छे से समझने के लिए हमें विभिन्न प्रकार के नाम के बारे में पढ़ना होगा। 

Goldfish एक अंग्रेजी नाम है इसका हिंदी सुनहरी मछली होता है। गोल्डफिश का साइंटिफिक नाम कैरेसियस ऑरेटर्स (Carassius Auratus) होता हैं।

यह मछली carausius जाती के कार्प परिवार से संबंध रखती है। यह मछली मूलभूत तरीके से मीठा पानी में रहती है और तेज पानी में सफर करने वाली मछली है। आमतौर पर सुनहरी मछली 3 इंच से 5 इंच लंबी होती है मगर किसी दुर्लभ जगह पर यह मछली 1 फुट लंबी भी देखी गई है और आमतौर पर इस मछली का वजन 100 ग्राम से डेढ़ सौ ग्राम तक होता है मगर कई जगहों पर इस मछली को 3 से 4 किलो का भी देखा गया हैं।

Goldfish का इतिहास

गोल्डफिश कुछ पुराने है मछलियों में से एक है इसे सर्वप्रथम जिन राजवंश (265 से 420) के साम्राज्य में देखा गया था। इस मछली को सबसे पहले चीन में देखा गया था वहां पर लोग इसके सुनहरे रंग से प्रभावित होकर इसे पालतू बनाते थे और खाद्य मछली के रूप में इस्तेमाल करते थे। 

इस मछली का पालन पोषण मुख्य रूप से तंग राजवंश (618 से 907) में शुरू हुआ जब लोग इसकी खूबसूरती से अधिक प्रभावित होने लगे तो बड़े-बड़े लोग इस मछली को खूबसूरत तालाब में एक नुमाइश की चीज बना कर रखते थे। शुरुआती दौर में सुनहरी मछली चांदी और सफेद रंग की भी होती थी मगर लोगों को नारंगी रंग और नींबू रंग अधिक पसंद आता था इस वजह से केवल उस तरह की मछली का संग्रह शुरू किया गया। 

1162 में जब संघ परिवार की महारानी ने सुनहरे रंग की मछली को देखा तो घर में जलाशय बनाकर इस तरह की मछली को रखने की ख्वाहिश व्यक्त की। उसके बाद से शाही परिवार में इस तरह की रंग बिरंगी मछली को रखने की एक परंपरा चीन से शुरू हुई जिससे आने जाने वाले पर्यटकों द्वारा भी बहुत पसंद किया गया और विभिन्न देश में इस तरह की नुमाइश घरों में रखने की परंपरा शुरू हुई। 

तब तक तो केवल रंग के आधार पर सुनहरी मछली को संग्रह किया जाता था मगर 1276 में मिंग राजवंश के शिलालेख में यह दर्ज किया गया कि केवल सुनहरी रंग की मछली नहीं कुछ खास किस्म की सुनहरी रंग की मछली जिनकी अत्यंत खूबसूरत लगती थी उनका संग्रह शुरू किया गया और वहां से हमें सुनहरी मछली के विभिन्न प्रकार के बारे में पता चला। इस तरह जब सुनहरी मछली को हर कोई पसंद करने लगा तो इसका व्यापार शुरू किया गया और 1502 में यह मछली जापान गई फिर 1611 में पुर्तगाल और वहां से यूरोप के अन्य देश जैसे यूक्रेन और फ्रांस में भी इस मछली का संग्रह शुरू किया गया। 

जब यह मछली अलग-अलग देश विदेश में पूरी तरह फैल गई तब आज हमें यह मछली अलग-अलग रूप रंग में दुनिया के किसी भी कोने में देखने को मिल सकती है इसकी सुंदरता लोगों को इतनी पसंद आती है कि संग्रह की जाने वाली सबसे प्रचलित मछलियों में से एक सुनहरी मछली हैं।

Goldfish कितने साल रह सकती है

जब हम किसी मछली की सुंदरता से मोहित होकर अपने घर के जलाशय में रखते है तो इस बात को भी ध्यान में रखते है कि उस मछली की उम्र कितनी है या एक बार अपने जलाशय में रखने पर वह मछली कितने वर्षों तक जीवित रहेगी और आपके घर की सुंदरता को बढ़ाएगी। 

अगर हम आम सुनहरी मछली की बात करें तो आमतौर पर इसे तालाब और विभिन्न जलपारातों में 40 वर्ष तक जीवित देखा गया है हम यह कह सकते है कि एक सुनहरी मछली का जीवनकाल 40 वर्ष तक होता हैं। 

मगर जब इस मछली को हम अपने घर या ऑफिस के जलाशय में रखते है तो कम जगह और कैद में होने के कारण इस मछली की उम्र कम हो जाती है कई बार उम्र कम होने का कारण मछली का आकार और खाने में या वातावरण में परेशानी भी हो सकता है मगर घर में या किसी साधारण जलाशय में रखे गए सुनहरी मछली की उम्र 8 से 10 वर्ष की देखी गई हैं।

सुनहेरी मझली कैसे वातावरण में रहती है

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया सुनहरी मछली को अगर अनुकूल वातावरण मिले तो वह 40 वर्ष तक जीवित रहती है अन्यथा व्यक्तिगत एक्वेरियम में यह मछली सात से आठ साल में मर जाती है इस वजह से आवश्यक है कि आप इस मछली के अनुकूल वातावरण को रखने का प्रयास करें। 

अगर हम सुनहरी मछली के वातावरण की बात करें तो यह ठंडे पानी की मछली है इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आप को पानी में बर्फ डाल कर रखना है। सुनहरी मछली जिस तापमान की पानी में रहती है वह तापमान 18 डिग्री से 26 डिग्री का होना चाहिए। अचानक पानी के तापमान में हुए परिवर्तन के कारण यह मछली मर भी सकती हैं।

इसके अलावा सुनहरी मछली को कम खाना पसंद है मगर जब आप इसे अधिक खाना देते है तो यह मछली रुकती नहीं है इस वजह से कहा जाता है कि सुनहरी मछली को उतना ही खाना देना चाहिए जितना वह 3 से 4 मिनट में खत्म कर ले अगर आप अधिक खाना देते है तो वह मछली बिना रुके खाने को खाती रहती है और कुछ ही दिनों में आत खराब होने की वजह से मर भी सकती हैं। 

निष्कर्ष

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Abhishek Maurya

मेरा नाम अभिषेक मौर्य है और मैं उत्तर प्रदेश वाराणसी डिस्ट्रिक्ट का रहने वाला हूं और मैं एक दिव्यांग हूं। मुझे अलग-अलग विषयों पर आर्टिकल लिखना बहुत अच्छा लगता है और इसी को मैंने अपना जुनून बनाया है। मैं पिछले 3 वर्षों से आर्टिकल लेखन का कार्य कर रहा हूं। आपको हमारे द्वारा लिखे गए लेख कैसे लगते हैं? आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं। मेरा भी एक हिंदी ब्लॉग है जिस पर मैं रिलेशनशिप के ऊपर आर्टिकल लिखता हूं जिसका यूआरएल इस प्रकार से है। माय वेबसाइट यूआरएल - https://hindibaatchit.com/

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