Mahatma Gandhi Essay In Hindi – महात्मा गांधी पर निबंध

Mahatma Gandhi Essay In Hindi अक्सर इंटरनेट पर यह प्रश्न लोग करते रहते है और इसका सटीक उत्तर भी ढूंढती रहते है। जैसा कि हम सभी लोग जानते है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हमारे देश को आजाद करने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया हुआ है और इसीलिए जब स्कूलों में परीक्षाएं होती है तब बच्चों को निबंध में  महात्मा गांधी जी का निबंध लिखने के लिए ज्यादातर बोला जाता है और आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निबंध पर जानकारी प्रदान करने वाले है। अगर आपको राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ऊपर निबंध लिखना है या फिर कहीं पर बोलना है तब ऐसे में हमारे द्वारा यहां पर दी गई जानकारी आपके लिए काफी ज्यादा सहायक पूर्ण हो सकती है और आप सभी लोग नीचे दी गई जानकारी को ध्यान से जरूर समझे क्योंकि आपको इसी से महात्मा गांधी पर निबंध लिखने में काफी ज्यादा हेल्प मिलने वाली हैं।

Mahatma Gandhi Essay In Hindi

जब हम भारत के महान सपूतों की बात करते है तो उनमें सबसे पहला नाम महात्मा गांधी का आता है या वह इंसान है जिसने उस वक्त के सबसे ताकतवर संगठन ब्रिटिश राज्य से अहिंसा के दम पर लोहा लिया था और हमारे भारत देश को आजादी दिलवाने में अहम भूमिका निभाई थी। भारत देश के प्रति महात्मा गांधी के कार्य को देखते हुए उन्हें भारत का राष्ट्रपिता माना जाता हैं। 

महात्मा गांधी का योगदान केवल देश को आजादी दिलाने में ही नहीं बल्कि देश के नव निर्माण करने में भी था। आज महात्मा गांधी की वजह से हम अपने देश में आजाद घूम रहे है किसी भी विदेशी के गुलाम नहीं है और आज देश में जिस प्रकार कानून चल रहा है और एक स्वतंत्र नागरिक की तरह हम ख्वाब देख पा रहे है यह सब की शुरुआत गांधी के द्वारा कई साल पहले हुई थी। 

आपको बता दें कि इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था जिनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में पोरबंदर नाम के के एक छोटे शहर में हुआ था। इनके पिता वकील थे और शहर में काफी नाम और शोहरत रखते थे। गांधी वैश्य जाति के थे और अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने शहर से ही पूरी कि जहां यह गणित में काफी कुशल थे। महात्मा गांधी के दो भाई और एक बहन थी जो हमसे छोटे थे, अगर हम उनके व्यक्तित्व की बात करें तो महात्मा गांधी बचपन से ही काफी शर्मीले किस्म के लड़के थे। 13 वर्ष की आयु में इनकी शादी कस्तूरबा गांधी नाम के एक सामान्य वर्ग की लड़की से करवा दिया गया जो इन से 1 वर्ष बड़ी थी। 

हम उस जमाने की बात कर रहे है जब वकीलों का अंग्रेजों के साथ बोलबाला चलता था। इसी को देखते हुए 21 वर्ष की आयु में अपने आगे की पढ़ाई करने के लिए महात्मा गांधी 1890 में इंग्लैंड के लिए रवाना हुए। वहां से वकालत की पढ़ाई पूर्ण करके आने पर दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी के किसी केस के सिलसिले में उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाने का मौका मिला। 

दक्षिण अफ्रीका जाने पर उन्होंने वहां काले लोगों की दयनीय स्थिति देखी और अंग्रेजों का बुरा बर्ताव देखा। इससे आहत होकर उन्होंने अपनी सर्वप्रथम राजनीतिक लड़ाई दक्षिण अफ्रीका में शुरू की, गोपाल कृष्ण गोखले महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में मिले और उनके राजनीतिक गुरु बने। उन्होंने अहिंसा और राष्ट्रवाद के दम पर राजनीतिक आंदोलन करने की सीख दी। कई सालों की आंदोलन के बाद जब वहां काले लोगों की स्थिति थोड़ी सुधरने लगी तब 1914 में महात्मा गांधी भारत वापस आय। 1 वर्ष पूरे देश में घूमने के बाद वह अहमदाबाद के साबरमती आश्रम के बाहरी इलाके में साबरमती नदी के तट पर 1915 में साबरमती आश्रम की स्थापना की और वहीं बस गए। 

वहा से उन्होंने आश्रम का नाम सत्याग्रह आश्रम रखा साथ ही सत्य और अहिंसा की राह पर चलने की कसम खाई और सत्याग्रह आंदोलन के साथ देश में आजादी की लड़ाई शुरू की। महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने और देश को आजाद करने के लिए 3 बड़े आंदोलन शुरू किया। इन तीन मुख्य आंदोलन को शुरू करने से पहले उन्होंने पटना में चंपारण नाम के गांव में नील की खेती कर रहे किसानों के लिए लड़ाई लड़ी और उन्हें वाजिब मुनाफा दिलवाया और इसके बाद 1920 में असहयोग आंदोलन जिसमें उन्होंने ब्रिटिश राज की सभी चीजों का बहिष्कार करने को कहा। उसके बाद 1939 में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। इसके बाद हजारों लोगों का काफिला लेकर 1942 में साबरमती से दांडी तक का सफर तय किया। इसी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन, डू और डाई का नारा देते हुए 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाया। 

गांधी को अपने दौर के सबसे प्रभावी व्यक्ति के रूप में देखा जाता है किस प्रकार उन्होंने पूरे देश पर अपना जादू बिखेरा जब मोबाइल और इंटरनेट का युग नहीं था उसके बावजूद लोग इनके एक बार कहने पर अपनी जान देने को तैयार हो जाते थे गांधी के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर कहीं नवयुवक और महिलाओं ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। 

महात्मा गांधी की विरासत की वजह से वह हमें सदैव याद रहेंगे उन्होंने अध्यात्म को राजनीति में लाने का कार्य किया घृणा और हिंसा को राजनीति से हटाकर इसे एक मानवीय कार्य बनाया। मगर अपने आंदोलनों के दम पर इस जमीन को आजाद करने के बाद गांधी स्वतंत्रता की शांति को भोगने के लिए अधिक दिन तक जीवित नहीं रहे। भारत को आजाद करने के लिए अंग्रेजों ने बहुत सारे शर्त रखी जिनमें पाकिस्तान का निर्माण भी एक शर्त था जिस बात से आहत नाथूराम गोडसे नाम के एक व्यक्ति ने महात्मा गांधी को 30 जनवरी 1948 को बाजार में गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। वे अपनी शाम की संध्या पूजा से लौट रहे थे इस घटना के वक्त वहां हजारों लोगों का भीड़ लग गया। महात्मा गांधी एक महान व्यक्ति थे जो अपने देश के लिए जीते और अपने देशवासियों के लिए शहीद हो गए। उनके इस सर्वोच्च बलिदान की वजह से आज उन्हें हम बापू के नाम से भी जानते है और राष्ट्रपिता के रूप में वह भारत के लिए सदैव जीवित रहेंगे। 

हम महात्मा गांधी को उनके कार्य की वजह से सम्मान में करते है और और उन्हें भारत का सर्वोच्च रिवार्ड भारत रत्न से भी नवाजा गया है। जिसके बाद हर साल हम 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाते हुए उन्हें याद करते हैं। 

महात्मा गांधी के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न

यहां पर हमने महात्मा गांधी जी के निबंध के ऊपर पूछे जाने वाले कुछ प्रश्नों के उत्तर बताए हुए हैं। 

Q. महात्मा गांधी का जन्म कब हुआ?

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1849 में पोरबंदर नाम के छोटे से शहर में हुआ था। 

Q. महात्मा गांधी कैसे परिवार से थे?

महात्मा गांधी काफी अच्छे परिवार से थे उनके पिता अपने शहर के नामी वकील हुआ करते थे। 

Q. महात्मा गांधी ने भारत में स्वतंत्रता आंदोलन कब शुरू किया?

महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से 1914 को आए और उसके बाद 1 साल भारत में घूमने के बाद उन्होंने 1915 से भारतीय आजादी में हिस्सा लिया मगर पहला सफल आंदोलन 1920 में शुरू किया। 

Q. महात्मा गांधी का पहला आंदोलन कौन सा था?

महात्मा गांधी का पहला आंदोलन चंपारन सत्याग्रह था जिसमें पटना के समीप चंपारण गांव में नील की खेती कर रहे किसानों के लिए ब्रिटिश सरकार के खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी। 

Q. महात्मा गांधी की पत्नी कौन थी?

महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी थी जिनसे उनकी शादी 13 वर्ष की उम्र में करवा दी गई थी और उन्हें 4 बच्चे हुए थे। 

निष्कर्ष

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Abhishek Maurya

मेरा नाम अभिषेक मौर्य है और मैं उत्तर प्रदेश वाराणसी डिस्ट्रिक्ट का रहने वाला हूं और मैं एक दिव्यांग हूं। मुझे अलग-अलग विषयों पर आर्टिकल लिखना बहुत अच्छा लगता है और इसी को मैंने अपना जुनून बनाया है। मैं पिछले 3 वर्षों से आर्टिकल लेखन का कार्य कर रहा हूं। आपको हमारे द्वारा लिखे गए लेख कैसे लगते हैं? आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं। मेरा भी एक हिंदी ब्लॉग है जिस पर मैं रिलेशनशिप के ऊपर आर्टिकल लिखता हूं जिसका यूआरएल इस प्रकार से है। माय वेबसाइट यूआरएल - https://hindibaatchit.com/

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