Trademark क्या है – ट्रेडमार्क की रजिस्ट्रेशन कैसे करें 3 स्टेप्स में

हर कोई चाहता है कि जब वह बाजार से किसी प्रोडक्ट को खरीदें तो वह पूरी तरह से शुद्ध भाव और सही हो। व्यापारी इस बात को समझते है कि लोग फ्रेंड के नाम से प्रोडक्ट को याद रखते है, इस वजह से ब्रांड में एक निशान या लोगों बनाया जाता है जो ब्रांड की परिभाषा बनती है जिसे ट्रेडमार्क कहा जाता है। अगर आप नहीं जानते कि Trademark Kya Hai तो आज के लेख में हम आपको बाजार में मौजूद असली और नकली प्रोडक्ट की परख करने के लिए ट्रेडमार्क की जानकारी देंगे। 

सरल शब्दों में तो आप यह कह सकते है, कि ऐसा फोटो या लोग हो जो इस बात को परिभाषित करता हो कि यह प्रोडक्ट उस ब्रांड से ताल्लुक रखता है मगर वर्तमान समय में तकनीक का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने के लिए भी किया जा रहा है। ट्रेडमार्क क्या है और इससे जुड़ी सभी जानकारियों को उदाहरण सहित सरल शब्दों में आपके समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।  

Trademark क्या है

सरल शब्दों में ट्रेडमार्क एक फोटो या लोगो होता है जो किसी प्रोडक्ट को परिभाषित करता है। जब आप किसी मोबाइल को खरीदने जाते हैं तो आपके मुंह से यह सवाल अवश्य आता होगा कि यह किस कंपनी का मोबाइल है आप जिस लोगो या चिन्ह को देखकर यह पता लगा पाते हैं कि यह प्रोडक्ट किस कंपनी के द्वारा बनाया गया है उसे ही ट्रेडमार्क कहा जाता है।  

उदाहरण के तौर पर जब किसी मोबाइल के पीछे आप आधा कटा हुआ सेब देखते है, तो अब समझ जाते हैं कि यह एप्पल कंपनी के द्वारा बनाया गया है। यहां एक चिन्ह के जरिए एप्पल कंपनी ने स्वयं को परिभाषित कर दिया यही एक ट्रेडमार्क कहलाता है। 

हम ट्रेडमार्क को परिभाषित करते हुए यह कह सकते है कि सरकार के तरफ से रजिस्टर्ड तौर पर किसी चिन्ह, निशान, डिजाइन, शब्द या वाक्य को किसी संगठन के सम्मान या दूसरों से अलग करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वस्तु है। आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि ट्रेडमार्क इस शुरुआत 1999 में की गई, जिस नियम को ट्रेडमार्क अधिनियम कहा जाता है। 

एक लाजमी सवाल है कि ट्रेडमार्क जैसा बिल्कुल वैसा ही चिन्ह कोई और भी बना सकता है? तो इसका जवाब है हां, उस तरह का चिन्ह कोई और बना तो सकता है मगर उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। 

जैसा कि हमने ट्रेडमार्क को परिभाषित करते हुए कहा कि यह एक सरकार की तरफ से रजिस्टर्ड चिन्ह होता है जिसे सरकार की तरफ से केवल एक संगठन या कंपनी को इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाती है। जैसे एप्पल कंपनी ने अपना एक सेब का निशान बनाया है जिसका इस्तेमाल केवल वह कंपनी ही कर सकती है अगर कोई और उस चिह्न का इस्तेमाल करता है तो उसे विश्व में कहीं भी सजा होगी। 

Trademark की जरूरत क्यों पड़ी

जैसा कि हमने आपको बताया ट्रेडमार्क एक कंपनी का चिन्ह होता है जिसके द्वारा वह कंपनी अपने प्रोडक्ट को दूसरों से अलग दर्शाती है और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करती है। अगर आपके मन में यह प्रश्न उठता है कि ट्रेडमार्क के बिना क्या हो जाएगा आखिर इसकी क्यों जरूरत पड़ती है?

सरल शब्दों में इसका जवाब देते हुए हम कहेंगे कि ट्रेडमार्क एक व्यक्ति के मन में विश्वास जगाता है ट्रेडमार्क इस बात का सबूत है कि इस प्रोडक्ट को किसी खास कंपनी के द्वारा ही बनाया जा रहा है जो आपकी समस्या का निराकरण करने के लिए सदैव तत्पर है। ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने वाली कंपनी को कानूनी तौर पर रजिस्टर्ड कंपनी माना जाता है जिस पर उसके कस्टमर का विश्वास और बढ़ जाता है। 

किसी भी संस्था प्रोडक्ट या सर्विस को प्रचलित करने के लिए आपको अपने कस्टमर का विश्वास जीतने की आवश्यकता है। जिसके लिए हम कह सकते हैं कि ट्रेडमार्क का इस्तेमाल कोई कानूनी इकाई, व्यवसायिक संगठन और व्यवसाय करने वाले व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। 

Trademark Registration कैसे करें

किसी भी व्यापार को एक अलग स्तर पर पहुंचाने के लिए आपको ट्रेडमार्क की आवश्यकता पड़ती है आमतौर पर ट्रेडमार्क 2 तरीकों से लिया जाता है पहला किसी व्यक्तिगत कार्य को केवल स्वयं के लिए दूसरा अपनी लिमिटेड कंपनी के लिए। अगर इन दोनों में से कोई भी तरीका आपको ठीक लगता है तो कुछ खास दस्तावेजों की आवश्यकता आपको पड़ेगी। 

अगर आप व्यक्तिगत चीज के लिए ट्रेडमार्क आवेदन करना चाहते है तो आपके पास पावर ऑफ अटॉर्नी, ट्रेडमार्क प्रश्न वाली और आधार कार्ड या पैन कार्ड होना चाहिए। इसके अलावा अगर आप अपने किसी लिमिटेड कंपनी के लिए ट्रेडमार्क आवेदन करना चाहते है तो आपके पास incorporation certificate, मंडल प्रस्ताओ, कंपनी का निवास प्रमाण पत्र, पावर ऑफ अटॉर्नी और कंपनी के मालिक के महत्वपूर्ण दस्तावेज। 

ऊपर बताई गई सभी दस्तावेज की कॉपी और ओरिजिनल आपके पास मौजूद है तो नीचे बताए गए निर्देशों का आदेश अनुसार पालन करने के बाद आप अपना ट्रेडमार्क कानूनी तौर पर रजिस्टर करवा सकते है – 

1. सबसे पहले आप इस की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं 

इस आधिकारिक वेबसाइट पर जाने के बाद आपको विभिन्न प्रकार के विकल्प दिखेंगे उनमें ट्रेडमार्क के लिए रजिस्ट्रेशन का विकल्प चुनें। वहां आपको ट्रेडमार्ट प्रश्नावली के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के फॉर्म में लेंगे जिन्हें निर्देश अनुसार भरना है और सबमिट करना है। 

2. Form-5 भरे 

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने में आपके समक्ष सारे फॉर्म ऑनलाइन आ जाएंगे इसके अलावा आप अपने इलाके के ब्लॉक ऑफिस में जाकर अपने कंपनी के ट्रेडमार्क के लिए ट्रेडमार्क का फॉर्म ले सकते हैं आपको कुल 5 फॉर्म लेने की आवश्यकता है। 

आपको पीएम मोंटी tm1, tm2, tm3, tm8, और m51 फॉर्म लेना है। इन सभी फॉर्म को निर्देश अनुसार सभी जानकारियों के साथ भरना है और अपने कंपनी के पावर ऑफ अटॉर्नी और ऊपर बताए गए अन्य दस्तावेज के साथ अटैच करना है। 

3. दस्तावेज और शुल्क जमा करें 

ट्रेडमार्क के लिए आवेदन करते वक्त आपको ₹4000 शुल्क देने होंगे ऊपर बताए गए सभी दस्तावेजों को ₹4000 के साथ जमा करें। 

आपको यह भी याद रखने की आवश्यकता है कि अगर आपका ट्रेडमार्क यीशु हो गया है और उसमें किसी प्रकार की समस्या आती है क्या आपको किसी दूसरे कंपनी पर विरोध करना है कि वह आपके ट्रेडमार्क इस्तेमाल कर रही है तो आपको tm5 फॉर्म भरने की आवश्यकता है। अगर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि आ जाती है और उसे अब ठीक करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको tm26 फॉर्म भर के ₹3000 शुल्क देने होंगे। 

आमतौर पर भारत में ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड करवाने में 1 से 2 साल लग जाते है। और हर ट्रेडमार्क की एक अवधि होती है जिसके बाद आपको उसे रिन्यू करवाना होगा वरना उसका इस्तेमाल कोई और कर सकता है। आपके ट्रेडमार्क की अवधि पूर्ण होने पर आपको tm10 फॉर्म भर के ₹3000 शुल्क जमा करके उसका रिन्यू करवाना है। 

Patent क्या है

ट्रेडमार्क के साथ जुड़ा हुआ एक और शब्द है जिसे पेटेंट कहते है। पेटेंट किसी आइडिया का करवाया जाता है ताकि आपके विचार की कोई कॉपी ना कर सके। जब आप अपना कोई ऐसा व्यापार शुरू करते हैं जिस की कॉपी बड़ी आसानी से की जा सकती है तो ऐसी परिस्थिति में अपने व्यापारिक विचार का पेटेंट करवाया जाता है ताकि आपके आइडिया का कोई कॉपी ना कर सके। 

सरल शब्दों में पेटेंट एक सरकारी कागज होता है जो इस बात को सत्यापित करता है कि आपका आईडिया केवल आपका है कोई और उसका इस्तेमाल नहीं कर सकता अगर ऐसा करता है तो आप उस पर केस करके उसके कार्य को बंद करवा सकते है। इस तरह के पेटेंट बेचे भी जाते हैं जिस व्यक्ति को आपके आईडिया पर काम करना होगा उसे आप से अनुमति लेनी होगी। 

आपको यह याद रखना चाहिए कि एक पेटेंट 20 वर्ष के लिए होता है अर्थात अगर आप किसी विचार या प्रोडक्ट का पेटेंट करवाते है, तो 20 वर्ष तक उसका इस्तेमाल करने के लिए आपसे मंजूरी लेने की आवश्यकता है जहां आप उनसे पैसे लेकर उन्हें इस्तेमाल करने की मंजूरी दे सकते है। 

Patent के प्रकार

अगर पेटेंट क्या होता है आप यह समझ गए हैं तो याद रखें पेटेंट के मुख्य रूप से दो प्रकार होते है –

1. उत्पाद पेटेंट 

यह एक प्रोडक्ट पर लगाया हुआ पेटेंट होता है अर्थात जब आप अपना कोई प्रोडक्ट बनाते है और कोई और वैसा ही प्रोडक्ट ना बना ले इसके लिए उस प्रोडक्ट का पेटेंट करवाया जाता है। उदाहरण के तौर पर आप बाजार में विभिन्न प्रकार के टूथपेस्ट को देखेंगे मगर आपको कोई भी टूथपेस्ट एक ही रंग और एक ही तरीके की नहीं मिलेगी। 

सरल शब्दों में अगर आप अपना कोई प्रोडक्ट बनाते है और उसका पेटेंट करवा लेते है तो वैसा ही प्रोडक्ट कोई भी व्यक्ति नहीं बना सकता बिना आपकी मंजूरी के। 

2. प्रक्रिया पेटेंट

यह एक महत्वपूर्ण है पेटेंट होता है जिसमें किसी भी प्रोडक्ट को बनाने की प्रक्रिया की चोरी कोई नहीं कर सकता। सरल शब्दों में अगर आप किसी प्रोडक्ट को बनाते है तो पेटेंट करवाने के बाद कोई भी व्यक्ति आप जिस प्रक्रिया से प्रोडक्ट बना रहे है इस प्रक्रिया से उस प्रोडक्ट को नहीं बना सकता। 

उदाहरण के तौर पर सबसे पहले फोर्ड कंपनी के द्वारा गाड़ी को बनाने के लिए असेंबली लाइन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया था जिस प्रक्रिया से वह बाकी कंपनी के मुकाबले 10 गुना ज्यादा तेजी से गाड़ी बना पाते थे मगर पेटेंट करवाने की वजह से 20 वर्ष तक इस प्रक्रिया का इस्तेमाल हुई थी दूसरी कंपनी नहीं कर पाई थी। 

इसी के साथ हमने आपको ट्रेडमार्क और पेटेंट क्या होता है के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी है इन सब का इस्तेमाल करके आप अपने व्यवसाय को और भी सुरक्षित और अधिक मुनाफा देने वाला बना सकते है। 

निष्कर्ष

अगर आपको Trademark Kya Hai लेख हेल्पफुल रहा है तो फिर आप यह लेख अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करना। इसके अलावा अगर आपको इस लेख से सम्बंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो उसके लिए आप निचे कमेंट बॉक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Abhishek Maurya

मेरा नाम अभिषेक मौर्य है और मैं उत्तर प्रदेश वाराणसी डिस्ट्रिक्ट का रहने वाला हूं और मैं एक दिव्यांग हूं। मुझे अलग-अलग विषयों पर आर्टिकल लिखना बहुत अच्छा लगता है और इसी को मैंने अपना जुनून बनाया है। मैं पिछले 3 वर्षों से आर्टिकल लेखन का कार्य कर रहा हूं। आपको हमारे द्वारा लिखे गए लेख कैसे लगते हैं? आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं। मेरा भी एक हिंदी ब्लॉग है जिस पर मैं रिलेशनशिप के ऊपर आर्टिकल लिखता हूं जिसका यूआरएल इस प्रकार से है। माय वेबसाइट यूआरएल - https://hindibaatchit.com/

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