ग्लोब किसे कहते है – Globe के प्रकार, इतिहास के बारे में जानिए हिंदी में

दोस्तों आज के समय में हमें इंटरनेट पर लगभग सभी महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाती है और यहां तक कि हम गूगल मैप का इस्तेमाल करके किसी भी लोकेशन का एग्जैक्ट पता जान सकते है और इतना ही नहीं कौन सा देश कितना बड़ा है और उसका नक्शा कैसा दिखाई देता है आदि के बारे में भी घर बैठे मोबाइल से पता लगाया जा सकता है परंतु पहले के समय में इन सभी जानकारी को हासिल करने के लिए ग्लोब का इस्तेमाल किया जाता था और अब आप सोच रहे होंगे Globe Kise Kahte Hai या फिर यह कैसा दिखाई देता हैं।

इसके अलावा अगर आप जानना चाहते हो कि ग्लोब का क्या इतिहास है? और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी ग्लोब से संबंधित जानना चाहते हो तो आप हमारे आज के इस महत्वपूर्ण लेट को शुरुआत से लेकर अंतिम तक ध्यान पूर्वक पर जरूर पढ़ें। हमने आज के इस महत्वपूर्ण लेख में ग्लोब से संबंधित उन सभी आवश्यक जानकारी के बारे में बताया हुआ है जो आपके लिए जानना बेहद जरूरी हैं। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कभी-कभी छोटे या फिर बड़े कंपीटेटिव परीक्षाओं में भी ग्लोब से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है और इसीलिए हम चाहते है कि आप हमारे इस लेख में दी गई जानकारी को शुरुआत से लेकर अंतिम तक पढ़े ताकि आपको ग्लोब से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में मालूम हो और आपको इससे संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए कहीं और बार-बार नए ब्लॉग को पढ़ने की आवश्यकता बिल्कुल भी ना हो।

ग्लोब किसे कहते है

ग्लोब पृथ्वी का एक लघु प्रतिरूप है, पृथ्वी के विभिन्न भौतिक प्रतिरूपों, महाद्वीपों, महासागरों, विभिन्न देशों, द्वीपों आदि की आकृति, स्थति, उनकी दिशा आदि को समतल कागज पर बनाए गये मानचित्र की अपेक्षा हम ग्लोब पर ज्यादा सही रूप से दर्शा सकते है। इसलिए ग्लोब पर बने मानचित्र बिलकुल सही होते हैं।

ग्लोब में दुनिया भर के देशों और मानचित्र के बारे में जानकारी दी गई होती है। ग्लोब के अंदर हमें पता चलता है कि कौन सा देश कितना बड़ा है और उसकी सीमा रेखा कहां से कहां तक है और इतना ही नहीं ग्लोब के अंदर ही हमें सभी देशों का नक्शा देखने को मिलता है। ग्लोब देखने में बिल्कुल फुटबॉल के आकार का होता है और इसमें सभी देशों, महाद्वीपों और दिशा आदि की जानकारी साफ-साफ दिखाई जाती हैं।

ग्लोब का इतिहास

ग्लोब का आविष्कार मार्टिन बेहम ने 1492 ईसवी में की थी वर्तमान समय में ग्लोब से लोग खगोलीय पिंड के बारे, में नदियों के बारे में और कुछ पर्वतों के बारे में इत्यादि चीज के बारे में ग्लोब को देखकर लोग जानकारी हासिल करते थे परंतु आज के समय में इंटरनेट के जरिए लोग किसी भी चीज की जानकारी तुरंत प्राप्त कर ले रहे हैं।

1000 साल पहले लोगों का कहना था कि ग्लोब का आकार अंडाकार है जबकि वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लोब का आकार गेंद की तरह होता है पहले के समय लोग सूर्य और चंद्रमा को देखकर ग्रहण का पता बहुत ही आसानी से लगा लेते थे क्योंकि जब 15 दिन बीत जाते थे पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा सीध में आने के कारण ग्रहण लगते थे और इस तरीके से पहले के लोग ग्रहण का पता लगा लेते थे हम आपकी जानकारी के लिए यह बता दे की सबसे पहला ग्लोब क्रेटस ऑफ मालस द्वारा बनाया गया था और यह दूसरी शताब्दी के ईसा पूर्व में बनाया गया था।

ग्लोब के प्रकार

दोस्तों अगर आप अपनी लाइफ में ग्लोब को कभी नहीं देखे होंगे तो ऐसे में आपको ग्लोब को पहचानने में थोड़ी तकलीफ होगी ऐसे में हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्लोब गेंद की आकार का होता हैं। 

और यह अपने अक्ष पर थोड़ा सा झुका हुआ होता है ऐसे में आप यह सोच रहे हो कि ग्लोब का आकार किसी कारण दब जाने से ग्लोब का अक्ष झुक जाता है ऐसे में आप गलत सोच रहे होते है ग्लोब का अक्ष हमेशा से ही थोड़ा झुका हुआ होता है और आप इस तरीके से ग्लोब को पहचान सकते हो। 

ग्लोब से संबंधित आपने बहुत कुछ जानकारी हासिल की अब हम बात करेंगे कि ग्लोब कितने प्रकार का होता है ग्लोब दो प्रकार के होते है हमने आपको नीचे उनके नाम लिखकर कुछ उनके बारे में जानकारी दी हुई है जिसे आप पढ़ कर बहुत ही आसानी से समझ सकते हो।

  • अकाशीय ग्लोब
  • स्थलीय ग्लोब

1. स्थलीय ग्लोब

दोस्तों स्थली ग्लोब का प्रयोग करके आप किसी भी देश की राजधानी, राज्य, पहाड़ और पर्वत इत्यादि चीज स्थली ग्लोब के जरिए जान सकते हो स्थलीय ग्लोब का इस्तेमाल ज्यादातर स्कूल में किया जाता है स्थलीय ग्लोब की मदद से टीचर स्टूडेंट को देश के बारे में समझाते हैं।

2. आकाशीय ग्लोब

दोस्तों अकाशीय ग्लोब का इस्तेमाल आम आदमी नहीं कर सकते है क्योंकि अकाशीय ग्लोब में खगोली पिंड के बारे में जानकारी दी हुई होती है इसका इस्तेमाल लोग खगोलीय पिंड के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अकाशीय ग्लोब का इस्तेमाल करते हैं।

मोबाइल में ग्लोब कैसे देखें

दोस्तों अगर आप मोबाइल में ग्लोब देखना चाहते है तो इसके लिए सबसे पहले आपके पास इंटरनेट होना चाहिए ग्लोब को मोबाइल में देखने से संबंधित हमने आपको नीचे कुछ स्टेप बताए हुए जिसे आप पढ़ कर बहुत ही आसानी से अपने मोबाइल में ग्लोब को देख सकते हो।

  • अपने मोबाइल में ग्लोब को देखने के लिए सबसे पहले आपके पास एक स्मार्टफोन होना चाहिए।
  • स्मार्टफोन होने के साथ-साथ आपके पास सिम व इंटरनेट होने चाहिए।
  • अब आपको अपने फोन में गूगल का सर्च इंजन ओपन कर लेना हैं।
  • जब आप गूगल को ओपन कर लेते हो तब आप वहां पर मोबाइल में ग्लोब कैसे देखें यह सर्च करें।
  • जब आप इतना प्रोसेस पूरा कर लेते हो तो आपके सामने कुछ वेबसाइट खुल जाती हैं उनमें से आपको गूगल अर्थ का वेबसाइट भी दिखेगा इसे ओपन कर ले
  • जब आप इस वेबसाइट को ओपन कर लेते हो तब आप बहुत ही आसानी से ग्लोब के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हो और ग्लोब को देख सकते हो।

गूगल मैप और ग्लोब में क्या अंतर है

दोस्तों अभी तक आपने ग्लोब के बारे में बहुत कुछ जानकारी हासिल की अब हम बात करेंगे कि गूगल मैप और ग्लोब में क्या अंतर है हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल मैप और ग्लोब में बहुत कुछ अंतर होता है क्योंकि एक प्रकार से देखा जाए तो ग्लोब को समझना बहुत ही मुश्किल होता है जबकि गूगल मैप को आप एक बार देख लेते हो तो आप बहुत ही आसानी से उसे समझ लेते हो हमने आपको नीचे कुछ और भी अंतर बताए हुए है जिसे आप पढ़ कर बहुत ही आसानी से समझ सकते हो।

  • दोस्तों अगर आपको कभी भी ग्लोब और मानचित्र में नदी का पता लगाना होता है तो ऐसे में आप मानचित्र के जरिए नदी का बहुत ही आसानी से पता लगा सकते हो क्योंकि मानचित्र में बहुत ही साफ साफ आपको हर एक चीज के बारे में जानकारी दी हुई होती है जबकि ग्लोब से आपको किसी भी चीज की जानकारी हासिल करने में थोड़ी समस्या होती है और आप इस तरीके से नदी का पता लगा सकते हो।
  • ग्लोब एक ऐसा चीज है जो कि पृथ्वी के बारे में पूरी जानकारी दी हुई होती है और मानचित्र भी एक ऐसा चीज होता है जिससे पृथ्वी के बारे में और कुछ खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी दी होती है ग्लोब और गूगल मैप में यही अंतर हैं।
  • ग्लोब और मानचित्र में सबसे बड़ा अंतर यह होता है कि अगर आपके सामने ग्लोब और मानचित्र दे दिया जाए और आपसे कुछ सवाल पूछ दिए जाएं तो आप सबसे पहले मानचित्र के जरिए ही जवाब दे जबकि आप ग्लोब को देखकर जवाब नहीं दे पाओगे।
  • दोस्तों ग्लोब के कोई प्रकार नहीं होते जबकि मानचित्र की अनेकों प्रकार होते हैं।
  • दोस्तों मानचित्र में आपको किसी भी चीज के बारे में सही सही जानकारी दी होती है जैसे जलवायु, रेल मार्ग, देशांतर, सीमाएं, अक्षांश इत्यादि चीज आपको मानचित्र में दी जाती हैं जबकि ग्लोब में यह सभी चीजें नहीं दी होती हैं।

ग्लोब को इस्तेमाल करने की विशेषताएं

दोस्तों हम ग्लोब का इस्तेमाल निम्नलिखित जगह और प्रमुख नदियों के बारे में जानने के लिए ग्लोब का इस्तेमाल करते है हमने आपको नीचे ग्लोब से संबंधित कुछ जानकारी दी हुई है कि ग्लोब का इस्तेमाल कहां किया जाता हैं।

  • ग्लोब की मदद से हम देश के बारे में जान सकते हैं।
  • ग्लोब की मदद से कौन सी रेखा किस जगह से गुजरती है इसकी जानकारी पता चलती हैं।
  • ग्लोब की मदद से हम एक देश से दूसरे देश की दूरी कितनी है इसका पता लगा सकते हैं।
  • ग्लोब की मदद से हम कुछ प्रमुख नदियां के बारे में जान सकते हैं।
  • ग्लोब को देखकर हम यह बता सकते है किसी भी राज्य की राजधानी क्या हैं।
  • ग्लोब की सहायता से ही हमें पता चलता है कि किसी भी देश का नक्शा कैसा दिखाई देता है और इतना ही नहीं हमारी पृथ्वी का एक चोर कहां से कहां तक है इसके बारे में भी ग्लोब के जरिए ही जानकारी मिल जाती है।

निष्कर्ष

अगर आपको Globe Kise Kahte Hai लेख हेल्पफुल रहा है तो फिर आप यह लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करना और इसके अलावा अगर आपको इस लेख से संबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो उसके लिए आप नीचे कमेंट बॉक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Abhishek Maurya

मेरा नाम अभिषेक मौर्य है और मैं उत्तर प्रदेश वाराणसी डिस्ट्रिक्ट का रहने वाला हूं और मैं एक दिव्यांग हूं। मुझे अलग-अलग विषयों पर आर्टिकल लिखना बहुत अच्छा लगता है और इसी को मैंने अपना जुनून बनाया है। मैं पिछले 3 वर्षों से आर्टिकल लेखन का कार्य कर रहा हूं। आपको हमारे द्वारा लिखे गए लेख कैसे लगते हैं? आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं। मेरा भी एक हिंदी ब्लॉग है जिस पर मैं रिलेशनशिप के ऊपर आर्टिकल लिखता हूं जिसका यूआरएल इस प्रकार से है। माय वेबसाइट यूआरएल - https://hindibaatchit.com/

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